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बादामी चालुक्य

02.03.2024

 

बादामी चालुक्य

 

प्रारंभिक परीक्षा के लिए: लेबल शिलालेख के बारे में, महत्वपूर्ण बिंदु, बादामी चालुक्य के खोजे गए 2 मंदिरों के बारे में, चालुक्य राजवंश के बारे में

 

खबरों में क्यों ?

हाल ही में तेलंगाना के नलगोंडा जिले में स्थित मुदिमानिक्यम गांव में कृष्णा नदी के तट पर दुर्लभ कम से कम 1300 से 1500 साल पुराने दो बादामी चालुक्य मंदिर और 1200 साल पुराने लेबल शिलालेख की खोज की गई है।

 

महत्वपूर्ण बिन्दु:

  • इन मंदिरों और लेबल शिलालेख की खोज पब्लिक रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर हिस्ट्री, आर्कियोलॉजी एंड हेरिटेज (PRIHAH) के महासचिव डॉ. एमए श्रीनिवासन और एस अशोक कुमार की टीम द्वारा किया गया।
  • 1673 ईस्वी का एक और शिलालेख, मुदिमानिक्यम के राम मंदिर में स्तंभ के दो किनारों पर स्थित है।
  • इसमें से एक तरफ का शिलालेख पढ़ने योग्य है,जबकि इसके  पीछे का हिस्सा पूरी तरह से घिसा हुआ है।
  • यह शिलालेख दान के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करता है।
  • भगवान जी लाल इंद्र ने वातापी के चालुक्यों को हूणों का उत्तराधिकारी बताया है।

 

लेबल शिलालेख के बारे में :

  • लेबल शिलालेख, बादामी चालुक्य काल के दौरान 8वीं या 9वीं शताब्दी ईस्वी का है।
  • जिसे 'गंडालोरंरू' के रूप में पढ़ा जाता है।
  • यह गांव के पांच मंदिरों के समूह के एक स्तंभ पर खुदा हुआ है।
  • हालांकि लेबल शिलालेख का सटीक अर्थ अभी स्पष्ट नहीं है, क्योंकि कन्नड़ में पहले दो अक्षरों "गंडा" का अर्थ "नायक" होता है।
  • यह संभवतः एक वीर उपाधि हो सकती है।
  • चूंकि लेबल शिलालेख 8वीं या 9वीं शताब्दी ईस्वी पूर्व का है, इसलिए पांच मंदिरों के इस समूह को पंचकुटा के नाम से जाना जाता है।
  • पांच मंदिरों के इस समूह की डेटिंग को भी बादामी चालुक्य काल के अंत में माना जा सकता है।
  • मंदिरों में से एक में शिव लिंग गायब है, जबकि एक अन्य मंदिर में विष्णु की मूर्ति लेटी हुई है।
  • ये सभी मंदिर वर्तमान में पूजा के लिए उपयोग में नहीं हैं और अप्राप्य हैं।

 

 

खोजे गए बादामी चालुक्य के 2 मंदिरों के बारे में :

  • ये मंदिर मुदिमानिक्यम गांव की सीमा पर स्थित है।
  • ये मंदिर 543 ईस्वी और 750 ईस्वी के बीच के माने जाते हैं।
  • इन मंदिरों का निर्माण बादामी चालुक्यों के शासन काल में किया गया था।
  • इन मंदिरों का निर्माण रेखा नगर प्रारूप में कदंब नगर शैली में किया गया है।
  • यह इस तरह की वास्तुकला का एकमात्र उदाहरण है।

 

चालुक्य राजवंश के बारे में :

  • चालुक्य राजवंश प्राचीन भारत का एक प्रसिद्ध राजवंश है।
  • चालुक्य राजवंश की राजधानी बादामी (वातापि) थी।
  • चालुक्य राजवंश वर्तमान समय के संपूर्ण कर्नाटक, पश्चिमी महाराष्ट्र, दक्षिणी मध्य प्रदेश, तटीय दक्षिणी गुजरात तथा पश्चिमी आंध्र प्रदेश में फैला हुआ था।
  • ये लोग इस रूढ़ि में विश्वास करते थे कि, परिवार का अधिष्ठाता ब्रह्मा की हथेली से उत्पन्न हुआ था।
  • एक किवदंती के अनुसार, चालुक्यों का मूल वासस्थान अयोध्या था, जहाँ से चलकर उस परिवार का राजकुमार विजयादित्य दक्षिण पहुँचा और वहाँ अपना राज्य स्थापित करने के प्रयत्न में पल्लवों से युद्ध करता हुआ मारा गया।
  • विजयादित्य का पुत्र विष्णुवर्धन् ने कदंबो और गंगों को परास्त किया और वहाँ अपने राज्य की स्थापना की।
  • विष्णुवर्धन् द्वारा राजधानी बीजापुर जिले में स्थापित की गई थी।
  • चालुक्य राजवंश कई शाखाओं में विभक्त था।

 

                                                             स्रोत:  इंडियन एक्सप्रेस

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