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नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप योजना

08.07.2025

 

नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप योजना

 

प्रसंग:
हाल ही में, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप (NOS) के अंतर्गत चयनित 106 उम्मीदवारों में से 66 को अनंतिम पुरस्कार पत्र जारी करने पर रोक लगा दी है, इसके पीछे धन की कमी और बजट स्वीकृति लंबित होने का हवाला दिया गया है।

 

नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप योजना (NOS) के बारे में:

  • यह केंद्र सरकार की एक योजना है, जो वंचित वर्ग के छात्रों को विदेशों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सहायता प्रदान करती है।
  • यह योजना शीर्ष QS रैंक वाले विदेशी विश्वविद्यालयों में मास्टर्स और पीएच.डी. कार्यक्रमों को कवर करती है।
  • वित्तीय सहायता में ट्यूशन फीस, रहने का खर्च, यात्रा व्यय, बीमा आदि शामिल हैं।
  • यह योजना सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा संचालित है, और अनुसूचित जातियों, विमुक्त जातियों तथा अन्य वंचित वर्गों को लक्षित करती है।

 

योजना के प्रमुख प्रावधान:

  • योग्यता: स्नातक/परास्नातक डिग्री में न्यूनतम 60% अंक; आयु 35 वर्ष से कम।
  • आय सीमा: पारिवारिक वार्षिक आय ₹8 लाख से कम होनी चाहिए।
  • विश्वविद्यालय की शर्त: QS की टॉप 500 रैंकिंग में आने वाले संस्थानों में प्रवेश आवश्यक।
  • वार्षिक सीमा: प्रति वर्ष केवल 125 छात्रवृत्तियाँ प्रदान की जाती हैं।
  • लैंगिक आरक्षण: महिला उम्मीदवारों के लिए 30% आरक्षण।
  • चयन प्रक्रिया: दो चरणों में चयन – QS रैंकिंग और मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों के आधार पर।
     

चुनौतियाँ:

  • वित्तीय विलंब: इस वर्ष 66 चयनित छात्रों को धन की कमी के कारण पुरस्कार पत्र जारी नहीं हो सके।
     → उदाहरण: स्वीकृति मिलने के बावजूद पुरस्कार पत्र जारी होने में देरी।
  • सीमित छात्रवृत्तियाँ: विदेश में पढ़ाई की बढ़ती आकांक्षाओं के बावजूद प्रति वर्ष केवल 125 छात्रवृत्तियाँ।
     → उदाहरण: हाल की चयन प्रक्रियाओं में 5000 से अधिक आवेदन।
  • प्रवेश निर्भरता: केवल उन्हीं को पात्रता है जिन्होंने पहले से टॉप विदेशी विश्वविद्यालयों में प्रवेश ले लिया हो।
     → उदाहरण: फीस की समय-सीमा के कारण सभी के लिए संभव नहीं।
  • भौगोलिक सीमा: प्रत्येक राज्य के लिए अधिकतम 10% सीटों की सीमा राज्यवार प्रतिनिधित्व को सीमित करती है।
     → उदाहरण: मेधावी छात्र राज्य कोटा के कारण चयन से वंचित हो जाते हैं।
     

आगे का मार्ग:

  • आवंटन में वृद्धि: वार्षिक बजट और सीटों की संख्या बढ़ाई जाए ताकि बढ़ती मांग पूरी हो सके।
     → उदाहरण: आकांक्षाओं के अनुरूप 200+ छात्रवृत्तियों का लक्ष्य रखा जाए।
  • समय पर धनराशि जारी हो: शैक्षणिक सत्रों के अनुरूप वित्तीय स्वीकृति समय पर सुनिश्चित की जाए।
     → उदाहरण: प्रवेश चक्र से पहले अग्रिम बजटीय प्रावधान हो।
  • लचीले मापदंड: QS टॉप 500 के अतिरिक्त विश्वविद्यालयों को भी मान्यता दी जाए।
     → उदाहरण: क्षेत्रीय या विषय-विशिष्ट रैंकिंग को भी स्वीकार किया जाए।
  • निगरानी तंत्र: चयन से लेकर निधि वितरण तक की प्रक्रिया पर नियमित निगरानी हो।
     → उदाहरण: नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल पर समर्पित डैशबोर्ड विकसित किया जाए।
     

निष्कर्ष:
 नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप योजना समाज के पिछड़े वर्गों को वैश्विक शिक्षा तक पहुंच दिलाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। लेकिन इसका प्रभावी लाभ तभी संभव है जब समय पर फंडिंग, अधिक समावेशी पात्रता और व्यापक पहुंच सुनिश्चित की जाए, ताकि इन छात्रों को एक उज्जवल भविष्य की दिशा में सशक्त किया जा सके।

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