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वन अधिकार अधिनियम, 2006

14.06.2025

 

 

वन अधिकार अधिनियम, 2006

 

2024–25 में, जनजातीय कार्य मंत्रालय ने धर्ती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत 18 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 300 समर्पित एफआरए सेल्स (FRA Cells) स्थापित कर एक राष्ट्रव्यापी योजना शुरू की, जिसका उद्देश्य वन अधिकार अधिनियम को मजबूत करना है।

 

एफआरए, 2006 के उद्देश्य

  • अधिकारों को मान्यता देना: अनुसूचित जनजातियों (STs) और अन्य परंपरागत वनवासियों (OTFDs) के पारंपरिक अधिकारों को स्वीकार करना, जो उनकी दैनिक जरूरतों के लिए वन भूमि पर निर्भर हैं।
  • जीविका को सुरक्षित बनाना: वन संसाधनों के टिकाऊ उपयोग को बढ़ावा देना जो पर्यावरण और स्थानीय लोगों की आर्थिक स्थिरता दोनों का समर्थन करे।
  • समुदायों को सशक्त बनाना: वन भूमि और प्राकृतिक संसाधनों पर कानूनी अधिकार प्रदान कर वन-आधारित समुदायों को सशक्त बनाना।
     

नए एफआरए सेल्स की मुख्य विशेषताएँ

  • ये सेल्स एफआरए के क्रियान्वयन की निगरानी और तेजी से निष्पादन में मदद करेंगी।
  • ये व्यक्तिगत और सामुदायिक लंबित वन अधिकार दावों का निपटारा करने में मदद करेंगी।
  • मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, महाराष्ट्र, असम और झारखंड जैसे राज्यों पर विशेष ध्यान दिया गया है जहाँ लंबित दावों की संख्या अधिक है।
  • ये सेल्स शिकायत निवारण और वनवासियों में जागरूकता बढ़ाने में भी मदद करेंगी।
     

वन अधिकार अधिनियम, 2006 के प्रावधान

  • पीढ़ियों से बसे लोगों को वन भूमि पर कानूनी अधिकार देना।
  • बाँस, शहद जैसे लघु वनोपज एकत्र करने और बेचने का अधिकार
  • चराई, मछली पकड़ने और जल स्रोतों के उपयोग का अधिकार
     
  • सामुदायिक वन अधिकार: समुदायों को वन संसाधनों का प्रबंधन और संरक्षण करने का अधिकार।
  • ग्राम सभा की भूमिका: दावों की पुष्टि और पुनर्वास सुनिश्चित करने के लिए ग्राम सभा को केंद्रीय भूमिका दी गई है।
     

क्रियान्वयन में मुख्य चुनौतियाँ

  1. जनजातीय आबादी में एफआरए अधिकारों की जानकारी की कमी
      उदाहरण: ओडिशा के कई गाँव सामुदायिक वन अधिकारों से अनजान हैं।
  2. जिला-स्तरीय समितियों द्वारा दावों की धीमी प्रक्रिया
      उदाहरण: अकेले मध्य प्रदेश में 3 लाख से अधिक दावे लंबित हैं।
  3. संरक्षण या विकास अभियानों के दौरान बेदखली की धमकी
      उदाहरण: टाइगर रिजर्व विस्तार के दौरान वनवासी बेदखल किए गए।
  4. कानूनी और प्रशासनिक भूमिकाओं में ग्राम सभा की कमजोर स्थिति
      उदाहरण: छत्तीसगढ़ के जनजातीय ब्लॉकों में प्रशिक्षण की कमी
     

आगे की राह

  1. स्थानीय अधिकारियों को एफआरए दावों के कुशल निपटान के लिए प्रशिक्षित करें
      उदाहरण: महाराष्ट्र में डिजिटल प्रशिक्षण मॉड्यूल सकारात्मक परिणाम दिखा रहे हैं।
  2. ग्राम सभाओं को कानूनी और प्रशासनिक साक्षरता प्रदान करें
      उदाहरण: झारखंड में कानूनी जागरूकता शिविर शुरू किए गए हैं।
  3. पारंपरिक वन उपयोग को दर्शाने के लिए जीआईएस तकनीक का उपयोग करें
      उदाहरण: तेलंगाना उपग्रह मैपिंग का उपयोग कर दावा सत्यापन कर रहा है।
  4. लंबित मामलों का मिशन मोड में समाधान करें
      उदाहरण: असम में विशेष दावा निपटान अभियान चलाया जा रहा है।
     

निष्कर्ष

एफआरए सेल्स की शुरुआत इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है कि कानूनी अधिकार केवल कागज़ पर न रहकर ज़मीनी हकीकत बनें। इसके सफल क्रियान्वयन के लिए सरकार को संस्थागत सुधार, स्थानीय सशक्तिकरण और तकनीक के बेहतर उपयोग को एक साथ जोड़ना होगा ताकि न्याय वास्तव में जमीनी स्तर तक पहुँच सके।

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