ज़ोजिला दर्रे पर एक दुखद एवलांच में पांच लोगों की मौत हो गई। यह घटना भारी बेमौसम बर्फबारी और उसके बाद अचानक तापमान बढ़ने से हुई, जिससे ज़ांस्कर रेंज की खड़ी ढलानों पर बर्फ़ का ढेर अस्थिर हो गया।
एवलांच किस वजह से हुआ?
क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति (उत्तर से दक्षिण):
ट्रांस-हिमालय और हिमालय के क्रम को समझना भौगोलिक संदर्भ के लिए ज़रूरी है:
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पास का नाम |
जगह |
मुख्य महत्व |
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ज़ोजिला दर्रा |
ज़ांस्कर रेंज (जम्मू-कश्मीर/लद्दाख) |
यह श्रीनगर-लेह नेशनल हाईवे (NH-1) के ज़रिए कश्मीर घाटी को लद्दाख से जोड़ता है । |
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उमलिंग ला |
पूर्वी लद्दाख |
दुनिया का सबसे ऊंचा मोटरेबल पास (19,000+ ft), जिसे BRO ने प्रोजेक्ट हिमांक के तहत बनाया है। |
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लिपुलेख दर्रा |
उत्तराखंड |
भारत-चीन-नेपाल ट्राई-जंक्शन पर स्थित ; कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए महत्वपूर्ण। |
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नाथू ला |
सिक्किम |
भारत और तिब्बत को जोड़ने वाला एक पुराना सिल्क रोड; एक बड़ा बॉर्डर ट्रेड पोस्ट। |
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शिपकी ला |
हिमाचल प्रदेश |
तिब्बत से भारत में सतलुज नदी का एंट्री पॉइंट । |
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बोमडिला |
अरुणाचल प्रदेश |
तवांग सेक्टर को बाकी भारत से जोड़ता है; पूर्वी हिमालय में स्ट्रेटेजिक दर्रा। |
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रोहतांग दर्रा |
हिमाचल प्रदेश |
पीर पंजाल रेंज में स्थित ; कुल्लू घाटी को लाहौल और स्पीति घाटियों से जोड़ता है। |
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पालघाट गैप |
पश्चिमी घाट |
वेस्टर्न घाट में सबसे चौड़ा ब्रेक; केरल और तमिलनाडु के बीच एक बड़े कॉरिडोर का काम करता है । |
ज़ोजिला त्रासदी से पता चलता है कि हिमालय के ऊंचे इलाकों में लॉजिस्टिक्स से जुड़े बहुत ज़्यादा एनवायरनमेंटल रिस्क हैं। सिविल सर्विस की तैयारी करने वालों के लिए, इन दर्रों की लोकेशन और नदियों से जुड़ाव को समझना ज़रूरी है, क्योंकि ये ज्योग्राफी और इंटरनल सिक्योरिटी मॉड्यूल दोनों में बार-बार आने वाला टॉपिक है।