डिजिटल शासन
प्रसंग
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ( MeitY ) ने IT नियम, 2021 में ज़रूरी बदलावों को नोटिफ़ाई किया है । बहस अब सिर्फ़ कंटेंट हटाने से हटकर कंटेंट के असली होने पर आ गई है , जिसमें यह ज़रूरी कर दिया गया है कि सभी AI-जनरेटेड या "सिंथेटिकली जीन रेटेड" मीडिया में ट्रेस किए जा सकने वाले डिजिटल टैग या वॉटरमार्क हों ताकि डीपफेक में बढ़ोतरी से निपटा जा सके ।
डिजिटल गवर्नेंस के बारे में
- परिभाषा: पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन को मॉडर्न बनाने के लिए ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी जैसे संवैधानिक सिद्धांतों के साथ डिजिटल टेक्नोलॉजी (AI, ब्लॉकचेन , क्लाउड) का इस्तेमाल ।
- कोर शिफ्ट: "कागज़ी कार्रवाई को डिजिटाइज़ करने" से आगे बढ़कर, समावेशी सर्विस डिलीवरी के लिए नागरिक, राज्य और बाज़ार कैसे बातचीत करते हैं, इसमें एक बड़ा बदलाव लाना।
डेटा और तथ्य
- आर्थिक असर: डिजिटल इकॉनमी ने 2025 में भारत की नेशनल इनकम में 13.42% का योगदान दिया; 2030 तक इसके 20% तक पहुंचने का अनुमान है।
- इंफ्रास्ट्रक्चर: 97% से ज़्यादा गांवों में मोबाइल कनेक्टिविटी है, जिसे 4.74 लाख 5G टावर सपोर्ट करते हैं।
- डिजिटल पहचान: 142 करोड़ आधार ID दुनिया के सबसे बड़े बायोमेट्रिक सर्विस डिलीवरी सिस्टम की रीढ़ हैं।
- रियल-टाइम पेमेंट: UPI से ₹24.03 लाख प्रोसेस हुए एक महीने (जून 2025) में करोड़ ।
- ई-गवर्नेंस स्केल: 2025 के बीच तक DigiLocker 53.92 करोड़ यूज़र्स तक पहुंच जाएगा, जिससे बहुत ज़्यादा फिजिकल पेपरवर्क खत्म हो जाएगा।
भारत में डिजिटल शासन की आवश्यकता
- डेमोक्रेटिक इंटेग्रिटी पक्का करना: AI से बने डीपफेक को पब्लिक बातचीत को गलत दिशा में ले जाने से रोकना।
- उदाहरण: 2025 के राज्य चुनावों में , I4C ने सांप्रदायिक तनाव भड़काने के लिए इस्तेमाल किए गए मनगढ़ंत वीडियो के खिलाफ दखल दिया।
- जेंडर आधारित साइबर-अब्यूज़ से निपटना: इस बात पर ध्यान देना कि दुनिया भर में 90% डीपफेक बिना सहमति के पोर्नोग्राफ़िक कंटेंट होते हैं।
- उदाहरण: 2025 में नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर डीपफेक शिकायतों में तेज़ी से बढ़ोतरी दर्ज की गई।
- फाइनेंशियल सिक्योरिटी: ऐसे फ्रॉड को रोकना जहां रिमोट KYC सिस्टम को बायपास करने के लिए "एनिमेटेड सेल्फी " का इस्तेमाल किया जाता है।
- उदाहरण: 2026 की शुरुआत तक, 5 में से 1 बायोमेट्रिक फ्रॉड की कोशिश में AI से होने वाले फेस स्वैप शामिल होंगे।
- सबको साथ लेकर चलने वाली डिलीवरी: BHASHINI प्लेटफॉर्म के ज़रिए भाषा की रुकावटों को तोड़ना , जो अब 35+ भाषाओं को सपोर्ट करता है।
- एडमिनिस्ट्रेटिव अकाउंटेबिलिटी: वेलफेयर में "लीकेज" को कम करना।
- उदाहरण: डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) ने 2025 में PM-KISAN स्कीम में लाखों "घोस्ट बेनिफिशियरी" को खत्म कर दिया।
चुनौतियां
- एल्गोरिदमिक ओपेसिटी: पुलिसिंग या वेलफेयर में इस्तेमाल होने वाले "ब्लैक-बॉक्स" AI सिस्टम में अक्सर ट्रांसपेरेंसी की कमी होती है, जिससे उनके खिलाफ अपील करना मुश्किल हो जाता है।
- निगरानी और प्राइवेसी: नए सिक्योरिटी ऐप्स के तहत बहुत ज़्यादा बायोमेट्रिक डेटा कलेक्शन से सरकार के दखल का खतरा।
- डिजिटल डिवाइड: स्ट्रक्चरल असमानता, जहाँ 5G के विस्तार के बावजूद ग्रामीण या बुज़ुर्ग नागरिक सिर्फ़ बायोमेट्रिक डिस्ट्रीब्यूशन के लिए संघर्ष करते हैं।
- बिग-टेक प्रभुत्व: कुछ प्लेटफॉर्म अर्ध-संप्रभु शक्तियों के रूप में कार्य कर रहे हैं, जिससे डिजिटल प्रतिस्पर्धा विधेयक (2024-25) सामने आ रहा है ।
- ज़्यादा मेंटेनेंस कॉस्ट: सोफिस्टिकेटेड साइबर क्रिमिनल्स से आगे रहने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने का लगातार चलने वाला चक्कर।
नैतिक सिद्धांत और आगे का रास्ता
नैतिक स्तंभ
- जवाबदेही ( धर्म ): AI का हर फ़ैसला एक ज़िम्मेदार इंसान तक पहुंचना चाहिए।
- न्याय : सिस्टम निष्पक्ष, समझाने लायक होने चाहिए और भारत की भाषाई विविधता का सम्मान करना चाहिए ।
- ट्रांसपेरेंसी: नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि वे किसी एल्गोरिदम या सिंथेटिक मीडिया के साथ इंटरैक्ट कर रहे हैं।
2026 की रणनीति
- लीड रेगुलेटर: अलग-अलग मंत्रालयों पर एक जैसी निगरानी के लिए एक ऑटोनॉमस डिजिटल रेगुलेटर बनाना।
- ' CrediMark ' को लागू करना: सभी सिंथेटिक कंटेंट के लिए ज़रूरी, लगातार डिजिटल टैग (प्रोवेंस)। इन्हें आसानी से हटाया नहीं जा सकता।
- 3-घंटे का टेकडाउन नियम: नए आईटी नियम संशोधन (20 फरवरी, 2026 से प्रभावी) के तहत प्लेटफॉर्म को फ्लैग किए गए डीपफेक को 2-3 घंटे के भीतर हटाना होगा ।
- रेगुलेटरी सैंडबॉक्स: स्टार्टअप्स को सुपरवाइज्ड एनवायरनमेंट में एडवांस्ड डिटेक्शन टूल्स को टेस्ट करने की अनुमति देना।
- नेशनल मीडिया-फोरेंसिक लैब्स: नागरिकों और अधिकारियों को नकली धोखे की पहचान करने में मदद करने के लिए लेटेस्ट लैब्स में इन्वेस्ट करना।
निष्कर्ष
विकसित भारत 2047 की ओर भारत का रास्ता एक डिजिटल गवर्नेंस मॉडल पर निर्भर करता है जो तेज़ी से इनोवेशन और संवैधानिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाता है। कंटेंट की जानकारी को ज़रूरी बनाकर और जवाब देने का समय कम करके, भारत एक भरोसेमंद डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ग्लोबल बेंचमार्क सेट कर रहा है जो इंसानी गरिमा को बनाए रखता है।