20.11.2025
हांगकांग कन्वेंशन (HKC)
प्रसंग
26 जून, 2025 को , दुनिया भर में जहाजों की सुरक्षित और इको-फ्रेंडली रीसाइक्लिंग सुनिश्चित करने के लिए हांगकांग कन्वेंशन (HKC) लागू हुआ ।
समाचार के बारे में
1. इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइज़ेशन (IMO) के तहत अपनाई गई एक ग्लोबल ट्रीटी है ।
2. इसका मकसद जहाज़ की रीसाइक्लिंग को मज़दूरों और पर्यावरण के लिए ज़्यादा सुरक्षित बनाना है ।
3. यह कन्वेंशन 2009 में अपनाया गया था , लेकिन 2025 में लागू हुआ ।
4. यह 500 GT से ज़्यादा के सभी जहाजों और ऑथराइज़्ड रीसाइक्लिंग यार्ड पर लागू होता है ।
मुख्य विशेषताएँ / प्रावधान
1. खतरनाक चीज़ों की इन्वेंटरी (IHM) : जहाजों को जहाज़ पर मौजूद
नुकसानदायक चीज़ों , जैसे एस्बेस्टस और भारी धातुओं का रिकॉर्ड रखना चाहिए ।
2. शिप रीसाइक्लिंग प्लान (SRP) : डिस्मेंटलिंग शुरू होने से पहले
यार्ड -स्पेसिफिक प्लान को मंज़ूरी मिलनी चाहिए।
3. ऑथराइज़्ड रीसाइक्लिंग यार्ड :
सिर्फ़ सर्टिफाइड यार्ड ही एनवायरनमेंट और सेफ्टी नियमों को मानते हैं और उन्हें ही जहाज़ों को रीसायकल करने की इजाज़त है।
4. रीसाइक्लिंग कंप्लीशन सर्टिफिकेट :
ऑथराइज़्ड जगहों से रीसाइक्लिंग पूरा होने के 14 दिनों के अंदर जारी किया जाता है ।
5. लेखा परीक्षा और प्रमाणन :
जानी-मानी क्लासिफिकेशन सोसायटी रेगुलर ऑडिट और इंस्पेक्शन करती हैं ।
6. वेस्ट मैनेजमेंट प्रोटोकॉल :
सभी खतरनाक वेस्ट की
सुरक्षित हैंडलिंग, स्टोरेज और डिस्पोज़ल पर ज़ोर।
चुनौतियां
1. विकासशील देशों के लिए कम्प्लायंस कॉस्ट :
भारत और बांग्लादेश जैसे देशों के लिए शिपयार्ड को अपग्रेड करना
महंगा है । जैसे, कई अलंग यार्ड को बड़े इन्वेस्टमेंट की ज़रूरत है।
2. इनफॉर्मल सेक्टर का दबदबा :
शिपब्रेकिंग का बड़ा हिस्सा अनरेगुलेटेड है , जिससे असुरक्षित काम होते हैं ।
जैसे, वर्कर्स को ज़हरीले पदार्थों के संपर्क में आना पड़ता है।
3. मॉनिटरिंग की सीमित क्षमता :
कुछ देशों में ट्रेंड ऑडिटर या सही ट्रैकिंग टूल की कमी है।
जैसे, वेस्ट हैंडलिंग पर कोई रियल-टाइम डेटा नहीं है।
4. पुराने जहाजों से विरोध :
पुराने जहाजों में IHM रिकॉर्ड की कमी हो सकती है , जिससे रेट्रोएक्टिव कम्प्लायंस मुश्किल हो जाता है।
जैसे, 2000 से पहले बने जहाजों को बड़े रेट्रोफिटिंग की ज़रूरत हो सकती है।
आगे बढ़ने का रास्ता
1. रीसाइक्लिंग हब में इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करें :
मॉडर्न, इको-फ्रेंडली रीसाइक्लिंग सुविधाओं में इन्वेस्ट करें ।
जैसे गुजरात के अलंग यार्ड में सरकार के सपोर्ट से मॉडर्नाइज़ेशन।
2. वर्कर्स के लिए ट्रेनिंग :
रीसाइक्लिंग लेबर्स के लिए
हेल्थ और सेफ्टी प्रोग्राम शुरू करें । जैसे IMO–ILO कोलेबोरेटिव सेफ्टी वर्कशॉप।
3. डिजिटल कंप्लायंस सिस्टम :
रियल-टाइम वेस्ट मॉनिटरिंग के लिए
IoT और ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करें । जैसे खतरनाक वेस्ट बिन के लिए बारकोड सिस्टम।
4. इंटरनेशनल फंडिंग और टेक्निकल सपोर्ट :
कम इनकम वाले देशों को
ग्रांट और टेक ट्रांसफर देना । जैसे, साउथ एशिया के साथ IMO के टेक्निकल कोऑपरेशन प्रोग्राम।
निष्कर्ष
हांगकांग कन्वेंशन का लागू होना ग्लोबल मैरीटाइम सस्टेनेबिलिटी में एक मील का पत्थर है , जो शिप रीसाइक्लिंग को एनवायरनमेंटल सेफ्टी और लेबर राइट्स के साथ जोड़ता है , खासकर डेवलपिंग इकॉनमी में।