ऑपरेशन किया
प्रसंग
जम्मू और कश्मीर के उधमपुर ज़िले के बसंतगढ़ इलाके में आतंकवाद के खिलाफ़ एक बड़ी लड़ाई हुई। पाकिस्तान के जैश-ए-मोहम्मद (JeM) संगठन के भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों की घुसपैठ की खास खुफिया जानकारी मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने ऑपरेशन किया शुरू किया।
ऑपरेशन किया के बारे में
परिभाषा: ऑपरेशन किया एक इंटेलिजेंस पर आधारित, जॉइंट काउंटर-टेररिज्म मिशन है जिसे इंडियन सिक्योरिटी ग्रिड ने जम्मू इलाके के घने, ऊंचाई वाले जंगलों में छिपे आतंकवादियों को ट्रैक करने और खत्म करने के लिए शुरू किया है।
प्रमुख विशेषताऐं:
- सिनर्जाइज्ड कमांड: यह ऑपरेशन आर्मी की व्हाइट नाइट कॉर्प्स (खासकर CIF डेल्टा ), जम्मू और कश्मीर पुलिस (JKP) और CRPF की मिली-जुली कोशिश है ।
- टैक्टिकल सटीकता: इस मिशन में ड्रोन और डॉग स्क्वॉड समेत एडवांस्ड सर्विलांस का इस्तेमाल किया गया, ताकि जोफर जंगल में एक नैचुरल गुफा में आतंकवादियों को फंसाया जा सके , और आखिर में कैलिब्रेटेड फायरपावर और एक्सप्लोसिव का इस्तेमाल करके उन्हें न्यूट्रलाइज किया जा सके।
मुख्य परिणाम (फरवरी 2026):
- कमांडरों को बेअसर करना: दो टॉप पाकिस्तानी आतंकवादियों को मार गिराया गया, जिसमें एक हाई-रैंकिंग JeM कमांडर, जिसकी पहचान रुबानी (उर्फ अबू माविया) के रूप में हुई , शामिल था।
- हथियारों की बरामदगी: सुरक्षा बलों ने US में बनी M4 कार्बाइन , AK-सीरीज़ राइफलें और "युद्ध जैसे सामान" समेत एडवांस हथियार बरामद किए, जिससे पता चलता है कि आतंकवादियों के पास बहुत ज़्यादा हथियार थे।
ऑपरेशन का महत्व
- विदेशी मॉड्यूल में रुकावट: अबू माविया जैसे लंबे समय से एक्टिव कमांडरों का खात्मा डोडा-उधमपुर-कठुआ सर्किट में एक्टिव आतंकी ग्रुप्स की लीडरशिप के लिए एक बड़ा झटका है।
- स्ट्रेटेजिक एरिया पर कब्ज़ा: बसंतगढ़ जंगल में नेचुरल गुफाओं और "डार्क स्पॉट्स" से आतंकवादियों को बाहर निकालकर, फोर्स ने ज़रूरी घुसपैठ के रास्तों पर फिर से कंट्रोल पा लिया है।
- इंटर-एजेंसी सिनर्जी: यह ऑपरेशन "सीमलेस कोऑर्डिनेशन" के लिए एक ब्लूप्रिंट का काम करता है, जो दिखाता है कि लोकल पुलिस से मिली रियल-टाइम इंटेलिजेंस को असरदार तरीके से टैक्टिकल मिलिट्री सफलता में कैसे बदला जा सकता है।
क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियाँ
- मुश्किल इलाका: बसंतगढ़ और रामनगर तहसीलों की घनी हरियाली और कुदरती गुफाएं छिपने की ऐसी जगहें देती हैं, जिन्हें पारंपरिक हवाई निगरानी से पता लगाना मुश्किल होता है।
- सर्दियों में फिर से उभरना: किश्तवाड़ में ऑपरेशन त्राशी-I जैसे पैरेलल ऑपरेशन, खराब मौसम और बर्फ से ढके इलाकों का इस्तेमाल बेस बनाने के लिए आतंकवादियों की कोशिशों के बड़े ट्रेंड की ओर इशारा करते हैं।
निष्कर्ष
ऑपरेशन किया भारतीय सुरक्षा बलों के "टेरर-फ्री जम्मू और कश्मीर" के कमिटमेंट को दिखाता है। मुश्किल भौगोलिक हालात में बड़े टारगेट को सफलतापूर्वक न्यूट्रलाइज़ करके, यह ऑपरेशन क्रॉस-बॉर्डर खतरों के खिलाफ अंदरूनी स्थिरता बनाए रखने में जॉइंट सिक्योरिटी ग्रिड के असर को और मज़बूत करता है।