LATEST NEWS :
Mentorship Program For UPSC and UPPCS separate Batch in English & Hindi . Limited seats available . For more details kindly give us a call on 7388114444 , 7355556256.
asdas
Print Friendly and PDF

सभासार पहल

सभासार पहल

प्रसंग

सभासार इनिशिएटिव ने काफ़ी रफ़्तार पकड़ी है, 1.11 लाख से ज़्यादा ग्राम पंचायतों ने इस AI-इनेबल्ड टूल को अपनाया है। केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने हाल ही में राज्यसभा को बताया कि इस प्लेटफ़ॉर्म ने 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मीटिंग डॉक्यूमेंटेशन को सफलतापूर्वक ऑटोमेट कर दिया है, जो डिजिटल ग्रासरूट गवर्नेंस में एक मील का पत्थर है।

 

समाचार के बारे में

सभासार क्या है?

14 अगस्त, 2025 को लॉन्च किया गया , सभासार एक AI-पावर्ड वॉइस-टू-टेक्स्ट और मीटिंग समराइज़ेशन प्लेटफ़ॉर्म है। इसे ग्राम सभा और पंचायत की कार्यवाही की ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग से ऑटोमैटिकली स्ट्रक्चर्ड मिनट्स ऑफ़ मीटिंग्स (MoM) बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

शामिल संगठन:

  • पंचायती राज मंत्रालय (MoPR): पॉलिसी को दिशा देने और उसे लागू करने वाला नोडल मंत्रालय।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY): इंडियाएआई मिशन के माध्यम से तकनीकी आधार प्रदान करता है ।
  • नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC): इसे सुरक्षित डेटा स्टोरेज और सुरक्षा के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है।

वर्कफ़्लो:

  1. रिकॉर्डिंग: ग्राम सभा की कार्यवाही ऑडियो या वीडियो के ज़रिए रिकॉर्ड की जाती है।
  2. अपलोड: अधिकारी सभासार पोर्टल पर फ़ाइल अपलोड करने के लिए -ग्रामस्वराज क्रेडेंशियल्स का इस्तेमाल करते हैं।
  3. प्रोसेसिंग: AI स्पीच को ट्रांसक्राइब करता है और ज़रूरी फ़ैसलों, एक्शन पॉइंट्स और रिज़ॉल्यूशन की पहचान करता है।
  4. आउटपुट: चुनी हुई भाषा में एक अच्छी तरह से फ़ॉर्मेट की हुई, स्ट्रक्चर्ड समरी बनाई जाती है।

 

प्रमुख विशेषताऐं

  • AI और NLP ट्रांसक्रिप्शन: यह नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग का इस्तेमाल करके चर्चा को स्ट्रक्चर्ड मिनट्स में बदलता है, जिससे यह पक्का होता है कि कोई भी ज़रूरी बातचीत छूट न जाए।
  • मल्टीलिंगुअल सपोर्ट (भाषिणी): भाषिणी प्लेटफॉर्म के साथ इंटीग्रेटेड , यह ग्रामीण भारत में भाषाई अंतर को कम करने के लिए 13 भारतीय भाषाओं (हिंदी, बंगाली, तमिल, तेलुगु और मराठी सहित) को सपोर्ट करता है।
  • सिक्योर डेटा गवर्नेंस: यह पूरी तरह से सरकार के कंट्रोल वाले क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर ( इंडियाAI कंप्यूट पोर्टल ) के अंदर काम करता है। यह डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट, 2025 का सख्ती से पालन करता है , जिससे यह पक्का होता है कि कोई भी डेटा थर्ड-पार्टी प्रोवाइडर्स के साथ शेयर न किया जाए।
  • गवर्नेंस एनालिटिक्स: इससे मिनिस्ट्री को देश भर में मीटिंग की फ्रीक्वेंसी, अटेंडेंस ट्रेंड और प्रस्तावों का स्टेटस ट्रैक करने में मदद मिलती है।

 

महत्व

  • जमीनी स्तर पर लोकतंत्र: आम नागरिकों के लिए रिकॉर्ड को ज़्यादा आसान और वेरिफ़ाई करने लायक बनाकर ग्राम सभाओं के "डायरेक्ट डेमोक्रेसी" पहलू को बढ़ाता है।
  • एडमिनिस्ट्रेटिव एफिशिएंसी: हाथ से लिखे रिकॉर्ड रखने से जुड़े मैनुअल वर्कलोड और गलतियों को काफी कम करता है।
  • ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी: स्टैंडर्ड डिजिटल रिकॉर्ड मीटिंग के बाद मिनट्स में बदलाव को रोकते हैं, जिससे लोगों का भरोसा बढ़ता है।
  • सोच-समझकर फ़ैसला लेना: यह पिछले प्रस्तावों का एक सर्च किया जा सकने वाला डिजिटल रिपॉजिटरी देता है, जो गांव के विकास के लिए डेटा-ड्रिवन प्लानिंग में मदद करता है।

 

आगे बढ़ने का रास्ता

  • कैपेसिटी बिल्डिंग: डिजिटल लिटरेसी की कमी को दूर करने के लिए पंचायत अधिकारियों को लगातार ट्रेनिंग देना।
  • इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार: "शैडो एरिया" में इंटरनेट कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना ताकि हाई-क्वालिटी वीडियो रिकॉर्डिंग की आसानी से अपलोडिंग हो सके।
  • पूरा इंटीग्रेशन: रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए सभासार और पंचायत NIRNAY पोर्टल के बीच पूरे डेटा स्ट्रीम इंटीग्रेशन को प्राथमिकता देना ।

 

निष्कर्ष

सभासार पहल ग्रामीण प्रशासन में एक बड़ा बदलाव दिखाती है, जो "पेपर-हैवी" से "AI-रेडी" गवर्नेंस की ओर बढ़ रही है। इंडियाAI मिशन का फ़ायदा उठाकर , सरकार ने न सिर्फ़ डॉक्यूमेंटेशन को मॉडर्न बनाया है, बल्कि पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) को ट्रांसपेरेंट और अकाउंटेबल बनाने के संवैधानिक अधिकार को भी मज़बूत किया है।

Get a Callback