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शेर जनगणना 2025

22.05.2025

 

शेर जनगणना 2025

 

प्रसंग

मई 2025 में गुजरात वन विभाग ने नई एशियाटिक शेर जनगणना रिपोर्ट जारी की, जिसमें 2020 की तुलना में 32% की वृद्धि दर्ज की गई — यह भारत में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

समाचार का सारांश

  • गुजरात ने मई 2025 में नवीनतम शेर आबादी डेटा जारी किया।
  • शेरों की संख्या 674 (2020) से बढ़कर 891 (2025) हो गई।
  • प्रमुख आवास: गिर राष्ट्रीय उद्यान, पनिया, और गिरनार अभयारण्य
  • गिर राष्ट्रीय उद्यान में सर्वाधिक (394) शेर पाए गए।
  • भारत में सर्वाधिक शेर केवल गुजरात में ही पाए जाते हैं।
     

शेरों की विशेषताएँ

  • एशियाटिक शेर केवल भारत (मुख्यतः गुजरात) में पाए जाते हैं।
  • इनका प्राकृतिक आवास: सूखी पर्णपाती वनस्पति और झाड़ीदार क्षेत्र
  • संरक्षण स्थिति: IUCN के अनुसार Vulnerable, पहले Endangered थे।
  • CITES परिशिष्ट-I में सूचीबद्ध – अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पूर्ण प्रतिबंध
  • वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I में पूर्ण सुरक्षा प्राप्त।
     

संरक्षण से जुड़ी चुनौतियाँ

  • सीमित आवास क्षेत्र के कारण रोगों और महामारी का खतरा अधिक।
    • उदाहरण: 2018 में गिर में वायरस प्रकोप से कई शेरों की मृत्यु।
  • मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ रहा है।
    • उदाहरण: ग्रामीण क्षेत्रों में पशुधन के शिकार से स्थानीय विरोध
  • वैकल्पिक आवास की कमी के कारण स्थानांतरण में अड़चन।
    • उदाहरण: कुनो-पलपुर अभयारण्य में शेर स्थानांतरण में देरी
  • इनब्रीडिंग (आंतरिक प्रजनन) का खतरा – आनुवंशिक विविधता बहुत कम।
    • उदाहरण: एक ही सीमित जनसंख्या समूह के कारण जीन पूल कमजोर।

आगे की राह

  • शेरों का अन्य स्थानों पर स्थानांतरण तेज किया जाए
    • उदाहरण: सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुमोदित योजना के अनुसार कुनो में स्थानांतरण।
  • नए आवास क्षेत्रों का विकास और ग्रीन कॉरिडोर का निर्माण
    • उदाहरण: गिर से अन्य अभयारण्यों को जोड़ने वाले जैविक गलियारे बनाना।
  • स्थानीय लोगों की भागीदारी को बढ़ावा दें
    • उदाहरण: गिर में सामुदायिक पर्यटन से आजीविका और संरक्षण दोनों को लाभ।
  • प्रोजेक्ट लायन को विस्तारित और मजबूत किया जाए।

निष्कर्ष

भारत की केंद्रित संरक्षण नीतियों और स्थानीय समुदायों के सहयोग से एशियाटिक शेरों की जनसंख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। लेकिन, सतत विकास के लिए आवश्यक है कि नए आवास विकसित किए जाएं, जीन विविधता बनाए रखी जाए, और स्थानीय सहभागिता को नीति में शामिल किया जाए।

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